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Monday, July 20, 2020

सावन | Savan | Angika Kavita | अंगिका कविता | रामनंदन विकल | Ramnandan Vikal

 

Angika Kavita | अंगिका कविता
सावन | Savan
रामनंदन विकल | Ramnandan Vikal

 नैना भेले रे रतनार
सावन घन घिरी ऐले बालम
चुनरी भींजलै सारी रात
घुमङि घन लरजै हो बालम ।

उमतैले पुरबा बयार
अंचरवा उङावै हो बालम
नीन गेलै रे परदेश
सावन घन घिरी ऐले बालम ।

विरहा जगावै कोईलिया
पपिहा पुकारै हो बालम
झकझोरै झिंगुरा के तान
सावन घन घिरी ऐले बालम ।
नैना भेले रे रतनार सावन घन घिरी ऐले बालम ।

 18-7-20

Angika Kavita | अंगिका कविता
सावन | Savan
रामनंदन विकल | Ramnandan Vikal

 

 


 

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