Angika Kavita | अंगिका कविता
गीत | Geet
रामनंदन विकल | Ramnandan Vikal
कामरू में जायकें मनैवे
जोग जगैवै गे माई
तबे ऐते बलम बिदेशिया
सुधिया के लिखतै गे पाती ।
ओहि पतिया हम्मं दैवी चङैवै
धूप-दीप अगर चननवां
परनमां जुङैवै गे माई ।
कौनी करनवां भुललै सजनवां
देवी सें पुछवै मनाई
जोग जगैवै गे माई
गगन मंङलवा के जोत अमरवा
नेहिया में लेवै नहाई
बलमुऑ रिझैवै गे माई ।
जोग जोगिनियां के छलकै गगरिया
शतदल देतै दिखाई
अनहत बजतै गे माई ।
धवल चन्दरमाॅ के गोट किनरवा
देवै पिरितिया लगाई
बलमुऑ बैठैवै गे माई ।
अवगुंठनवां के गांठ कटैवै
एकटक रहवै निहारी
परनमां जुङैवै गे माई ।
कामरू में जायकें मनैवे----।
25-7-20
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रामनंदन विकल | Ramnandan Vikal

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