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Monday, July 27, 2020

गीत | Geet | Angika Kavita | अंगिका कविता | रामनंदन विकल | Ramnandan Vikal

 

Angika Kavita | अंगिका कविता
गीत | Geet
रामनंदन विकल | Ramnandan Vikal

कामरू में जायकें मनैवे
जोग जगैवै गे माई
तबे ऐते बलम बिदेशिया
सुधिया के लिखतै गे पाती ।

ओहि पतिया हम्मं दैवी चङैवै
धूप-दीप अगर चननवां
परनमां जुङैवै गे माई ।

कौनी करनवां भुललै सजनवां
देवी सें पुछवै मनाई
जोग जगैवै गे माई

गगन मंङलवा के जोत अमरवा
नेहिया में लेवै नहाई
बलमुऑ रिझैवै गे माई ।

जोग जोगिनियां के छलकै गगरिया
शतदल देतै दिखाई
अनहत बजतै गे माई ।

धवल चन्दरमाॅ के गोट किनरवा
देवै पिरितिया लगाई
बलमुऑ बैठैवै गे माई ।

अवगुंठनवां के गांठ कटैवै
एकटक रहवै निहारी
परनमां जुङैवै गे माई ।
कामरू में जायकें मनैवे----।

 

25-7-20

 

Angika Kavita | अंगिका कविता
गीत | Geet
रामनंदन विकल | Ramnandan Vikal

 

 

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