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Monday, March 2, 2020

होली रो उमंग |Holi Ro Umang | अंगिका कविता | अरूण कुमार पासवान | Angika Kavita | Arun Kumar Paswan

 

Angika Kavita | अंगिका कविता
होली रो उमंग |Holi Ro Umang
अरूण कुमार पासवान  | Arun Kumar Paswan


साल भरी बाद है होली रो उमंग,
सबकुछ भूली के करै के हुड़दंग,
धिया-पुता जौं भाग-दौड़ करथौं,
खेले-कूदे दिहो होय नै जैहो तंग।

रंग खेली के उत्साह मनाबे दिहो,
प्रेम-पूर्वक तों अबीर लगाबे दिहो,
परबे बहाना ते होय छौं भेंट-घाँट,
खत्म होय रेल्हो छौं पुरनका ढंग।

है मतर ध्यान रहे रंग बस रंग रहे,
होली खेलै के ठीकठाक ढंग हुए,
पिचकारी सँ बस प्रेम-रंग निकले,
प्रेम बढ़े,दूरी मिटे कायम रहे संग।

हरदम आबै छौं गाँव घरो के याद,
शहरों में कहाँ छी हौ रंग आज़ाद!
टोलो-समाजो,इलाका के हौ स्नेह,
मन मचलै छै याद करल्है के संग।
              अरुण कुमार पासवान,
            दिल्ली-हैदराबाद फ्लाइट
                 01 मार्च,2020 ई.
 

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होली रो उमंग |Holi Ro Umang
अरूण कुमार पासवान  | Arun Kumar Paswan

 




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