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Tuesday, November 30, 2010

डेंगू भगाबो | अंगिका कविता | अरूण कुमार पासवान | Dengua Bhagabow | Angika Poetry | Arun Kumar Paswan

 


डेंगू भगाबो | अंगिका कविता | अरूण कुमार पासवान
Dengua Bhagabow | Angika Poetry | Arun Kumar Paswan


गली-मोहल्ला साफ कराबो,

सब सँ पैल्हें डेंगू के भगाबो।


घातक बहुत छौं है महामारी,

परेशान छै व्यवस्था सरकारी,

करी दै छै यें मुश्किल भारी,

कतना लोगो के देलकै मारी।

बचलो जे छै होकरा बचाबो,

सब सँ पैल्हें डेंगू के भगाबो।



नाली-गड्ढा राखो साफ़-सुथरा,

साफो जमा-पानी सँ छै खतरा।

पानी पर लगाबो ढक्कन के पहरा,

सौंसे देहो पर पिन्हले राखो कपड़ा।

हाफ पैंटो सँ टांग नै देखाबो,

सब सँ पैल्हें डेंगू के भगाबो।



बोखार होथैं दौड़ो अस्पताल,

डॉक्टर के कहो आपनो हाल।

जे बताभौं इलाज ले तत्काल,

दोसरो काम आय नै ते काल।

नै ते छिपाबो,नै ते मटियाबो,

सब सँ पैल्हें डेंगू के भगाबो।



सरकारी आरो सामाजिक प्रयास,

भगाबे पारे हेकरा राखो विश्वास।

आस-पास नै हुवे मच्छर के बास,

है बात के सावधानी राखो खास।

रहो सावधान खुशी मनाबो,

सब सँ पैल्हें डेंगू के भगाबो।


अरुण कुमार पासवान

ग्रेनो,25 नवम्बर,2019

डेंगू भगाबो | अंगिका कविता | अरूण कुमार पासवान
Dengua Bhagabow | Angika Poetry | Arun Kumar Paswan

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