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Friday, September 12, 2014

हमरऽ गाँव | Hamrow Gaon | Angika Kavita | अंगिका कविता | गोरे लाल मनीषी | Gore Lal Manishi

 

 

Angika Kavita | अंगिका कविता
हमरऽ गाँव | Hamrow Gaon
गोरे लाल मनीषी  | Gore Lal Manishi

जहाँ लोग पैसा दू पैसा ल॑ एक दोसरा के थैली काटै छै 

धोखा करै छै, परपंच रचै छै

आरू बात-बात में ढेर सनी खखार,पीक थूकी क॑

कहै छै -   दुनिया बड़ी खराब होय गेलऽ छै !


आपनऽ माय बहिनी क॑ सात ताला में

कैद करी क॑ राखै ल॑ चाहै छै

मगर दोसरा के माय-बहिनी के चरित्र-चित्रण करना

ओकरो शारीरिक संरचना के अध्ययन विश्लेषण करना

आपनऽ पुश्तैनी पेशा मानै छै !


लोग रोजिना साँझ दारू स॑  मांतलऽ बड़बड़ैलऽ घऽर आबै छै

आरू तनी-मनी भूमिका के बाद बिना नागा

आपनऽ पत्नी क बेतरह पीटै छै

माइयऽ क गारी परै छै

तहिय्यऽ  पत्नी अपनऽ पति ल॑ 

आरू माइयें अपनऽ बच्चा ल॑ बरत राखै छै, उपास राखै छै

कत्त॑ लातऽ स॑ घिरलऽ फुटबॉलऽ रं होय छै हुनको जिनगी

मतर हुनका जिमा होय छै कुछ बड़ऽ आदिम 

दुःख भरलऽ खिस्सा वला गीत !


सरकार के साक्षरता अभियानऽ स॑ बेखबर छौरा सनी

छुपी-छुपी बीड़ी के सुट्टा मारी-मारी गुल्ली खेलै छै

आरू छौरी सनी आपनऽ-आपनऽ घरऽ के खाना पकैला के बाद

पास-पड़ोस के घरऽ में बिल्ली बनलऽ फिरै छै

छौरी सनी समय स॑ पहिनैं सयानी होय जाय छै

घरऽ के काम-काज स॑ फुरसत निकाली क

राजकुमारऽ के सपना देखै छै

कहिय्यो कोय छौरा कन्हौं असकेल्लऽ अन्हारऽ में

कोय छौरी के हाथ पकड़ी लै छै  

आरू डऽर स॑ थरथरैतें, आवेश स॑ हाँफतें, वासना स॑ काँपतें

कहै छै - बहुत प्यार करै छियौ हम्में तोरा स॑ !


फेरू एक दिना छौरी के बीहा होय जाय छै

कोय अलना जी के बेटा फलना जी स॑

जे कोनो चिलना शहरौ में कोनो काम-वाम करतें होय छै 

हिन्नें छौरा कुछ दिना तलक निराश-हताश, असफल-असहाय

उदास सूरत ल॑ क॑ हिन्नें-हुन्नें डोललऽ फिरै छै

फेरू आस्तें-आस्तें सब्भे कुछ ठीक-ठाक होय जाय छै

बस कह्हियो काल जब॑ कोनो उचाट दुपहरी में 

नौअ्आ हाँ बाल बनबाबै घड़ी रेडियो पर

कोनो उदास गीत सुनै छै 

होकरऽ करेजा हहरै लागै छै !  


वै छोटऽ रं बस्ती में लोग छोटऽ-छोटऽ छै

छोटऽ-छोटऽ घऽर, छोटऽ-छोटऽ दोकान

छोटऽ-छोटऽ खिस्सा, आरू वैन्हें बहस

हुनकऽ इच्छा भी छोटे-छोटे छै

छोटऽ-मोटऽ जग्घऽ पर कुछ छोटऽ-मोटऽ

काम करतें होय छै हुनी सनी

छोटऽ-मोटऽ बातऽ पर निर्भर छै हुनकऽ सुख-दुख

एक्के चीज छै जे छोटऽ नै भलुक बहुत बड़ऽ छै

उ छेकै हुनकऽ जिनगी के एकरस रफ्तार !

 

हम्में एगो ऐन्हऽ बस्ती में पैदा होल्हौं

जहाँ पैदा होला के कोय गर्व नै हमरा भीतर

तैय्यो  किजन कैन्हें 

हम्में वहीं, वही मट्टी में जनम लै ल॑ चाहै छौं बारम्बार !

 

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