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Monday, July 6, 2020

दुलरिया | Angika Kavita | अंगिका कविता | सुधीर कुमार प्रोग्रामर | Dularia | Sudhir Kumar Programmar

 

दुलरिया  | अंगिका कविता | सुधीर कुमार प्रोग्रामर
Dularia | Angika Kavita | Sudhir Kumar Programmar

 
गरजी गरजी बरसे करका बदरबा जे
कोनी ठीहां माचिया विछाबौ गे दुलरिया
झरिये में भींगी गेलै गेनरा भोथरबा जे
भींगी गेले अचरा के कोर गे दुलरिया ।
 
भींगी भींगी सुख्खी गेलौ छतिया के दूधबा जे
सुख्खी गेलौ आँखी केरो लोर गे दुलरिया
चाटी-चाटी लाल भेलौ हांथो के अंगुठबा से
लाले-लाले सुगनी के ठोर गे दुलरिया।
 
अरजै लै बाबू गेलौ, टकबा के ढेरिया जे
वहीं जाय के सुतलौं निभोंर गे दुलरिया
जागी-जागी सुती गेलौ मनो के सपनमां जे
सुती गेलै जिनगी के भोर गे दुलरिया।
 

दुलरिया  | अंगिका कविता | सुधीर कुमार प्रोग्रामर
Dularia | Angika Kavita | Sudhir Kumar Programmar

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