Search Angika Kavita Sahitya

Thursday, February 8, 2018

तिलकामाँझी | बरहमा सर्ग |अंगिका कविता | हीरा प्रसाद हरेंद्र | TilkaManjhi | Canto-12 | Angika Kavita | Hira Prasad Harendra

तिलकामाँझी


पहिलऽ सर्ग  | दोसरऽ सर्ग | तेसरऽ सर्ग | चौथऽ सर्ग | पाचमां सर्ग | छठा सर्ग | सतमा सर्ग | अठमा सर्ग | नौमां सर्ग | दसमा सर्ग | एगारमा सर्ग | बरहमा सर्ग | तेरहमा सर्ग | चौदहमा सर्ग




तिलकामाँझी


बरहमा सर्ग (-)


— हीरा प्रसाद हरेंद्र —


तिलका अमर होलै मगर, नीना विकल संसार म॑।
सोचै सदा पतवार बिन, नैया फसै मझधार म॑।। 1।।
भगवान नीना के विमुख, होलऽ फिरै आकाश म॑।
नीना दुखी पागल बनी, खोजै यहां आवास म॑।। 2।।
दिन-रात तिलका साथ जीयै के रहै अरमान जब।
भारी मुसीबत सिर पड़ै, बोझोॅ लगै छै जान अब।। 3।।
तिलका रहै कहनें कभी, विधवा बनी जीना अगर।
शादी करऽ फौलाद सें, कुछ बात नैं समझै मगर।।4।।
बलिदान होना देश हित, परिवार देनें ज्ञान छै।
जब देश पर खतरा रहै, बचलऽ कि हमरऽ शान छै।।5।।
समझी-बुझी नीना बढ़ैनें बात सबक॑ ज्ञात छै।
नीना मगर लाचार बनवारी करै उत्पात छै।। 6।।


करै लाचार बनवारी घरऽ पर रोज आबी क॑।
जताबै प्यार कुछ अहिनों, बराबर आंख दाबी क॑।। 7।।
दबाबो खूब डलबाबै पुलिस क॑ साथ लानी क॑।
बताबै रोज दुख नीना पड़ोसी पास कानी क॑।। 8।।
पुलिस के साथ बनवारी फिरै अखनी सगर वन म॑।
करै सब काम आबै ओकरा जे-जे अभी मन म॑।। 9।।
चलाबै वाण नीना पर नजर के रोज बनवारी।
लगै मुश्किल बचाना मान-इज्जत, जान अब भारी।। 10।।


हैसियत के बात बनवारी जहां बोलै।
ओकरा आगू कहां मुंह कोय भी खोलै।। 11।।
के मदद करतै यहां नीना सदा दुखिया।
आज बनवारी कहाबै गांव के मुखिया।। 12।।
आत्म हत्या एक चारा शेष छै, लागू।
बस प्रतिष्ठा लेॅ करेॅ चाहै वह॑ आगू।। 13।।
सूरजा के पास बोलै जाय जब नीना।
सूरजा आंसू बहाबै व्यर्थ छोॅ जीना।। 14।।
एक बनवारी यहां उत्पात करनें छै।
सौ पहाड़ी क॑ अकेले मात करनें छै।। 15।।
जान पर खेली अभी ठोकर लगाना छै।
सब पहाड़ी क॑ यहां अखनी बुलाना छै।।16।।
देर नैं लगलै जरा जुटलै पहाड़ी तब।
बात पूछै की मुसीबत दोसरऽ छै अब।। 17।।


कहै सूरजा मित्रऽ लेगी,
नीना केरऽ बात।
नीना के डूबी गेलऽ छै,
आंसू म॑ दिन-रात।। 18।।
आत्म हत्या करै लेॅ चाहै,
नीना अब पछताय।
बनवारी देनें छै अखनी,
पूरा धूम मचाय।। 19।।


साथी-संगी राह बताबोॅ,
करियै कोन उपाय।
की बनवारी के टक्कर म॑,
दीयै जान गमाय।। 20।।
बात सूरजा केरऽ सुनथैं,
सबक॑ लागै आग।
पर बनवारी के छै अखनी,
अंग्रेजऽ सें लाग।। 21।।
बनवारी सें टक्कर लेना,
अखनी टेढ़ोॅ खीर।
कौनें जानै की लिखलौ छै,
नीना के तकदीर।। 22।।
बनवारी के आतंकोॅ सें,
मुश्किल पाना पार।
मानोॅ हर मोड़ोॅ पर होथौं,
अखनी तोरऽ हार।। 23।।
मरै‘मिटै के बात अगर छै,
हमरऽ एक बिचार।
नैं करना छै बनवारी सें,
झूठ-मूठ तकरार।। 24।।


नीना नकली प्रेम भाव सें,
पहिनें लै अपनाय।
फेनूं अवसर पाबी केन्हौं,
जमपुर दै पहुंचाय।। 25।।


बात सूरजा नीना लेगी,
तब बोलै समझाय।
मरला सें पहिनें तों बेटी,
करें एक चतुराय।। 26।।
देशों के दुश्मन बनवारी,
धरती पर अभिशाप।
मारें केन्हौं तभिये होतौ,
पवित्र पश्चाताप।। 27।।
स्वरगोॅ म॑ तिलका क॑ होतै,
तब भारी संतोष।
चिन्ता छोड़ी आगू सोचें,
व्यर्थ गमाना होश।। 28।।


बहादुरी के काम करें,
तिलका केरऽ नाम बढ़ाव।
बाप सूरजा केरऽ बेटी,
आदेशोॅ क॑ शीश चढ़ाव।। 29।।



तिलकामाँझी


पहिलऽ सर्ग  | दोसरऽ सर्ग | तेसरऽ सर्ग | चौथऽ सर्ग | पाचमां सर्ग | छठा सर्ग | सतमा सर्ग | अठमा सर्ग | नौमां सर्ग | दसमा सर्ग | एगारमा सर्ग | बरहमा सर्ग | तेरहमा सर्ग | चौदहमा सर्ग




Angika Poetry  : Tilkamanjhi / तिलकामाँझी
Poet : Hira Prasad Harendra / हीरा प्रसाद हरेंद्र
Angika Poetry Book / अंगिका काव्य पुस्तक - तिलकामाँझी

 

तिलकामाँझी | बरहमा सर्ग |अंगिका कविता | हीरा प्रसाद हरेंद्र  | TilkaManjhi | Canto-12 |  Angika Kavita | Hira Prasad Harendra

No comments:

Post a Comment

Search Angika Kavita Sahitya

Carousel Display

अंगिकाकविता

वेब प नवीनतम व प्राचीनतम अंगिका कविता के वृहत संग्रह

A Collection of latest and oldest Angika Language Poetries , Kavita on the web




Search Angika Kavita Sahitya

संपर्क सूत्र

Name

Email *

Message *