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Monday, August 10, 2015

झिंगली केरऽ फूल | अंगिका कविता | कुंदन अमिताभ

झिंगली केरऽ फूल


— कुंदन अमिताभ —


गम – गम गमकी रहलऽ छै
झिंगली केरऽ फूल
गोधूलि बेला लगीच छै
देहरी – भंसा घूमी करी
संकेत द॑ रहलऽ छै
झिंगली केरऽ फूल ।


धोरैय ऐतै – बैहारी दन्नं॑ सं॑
चराना बंद करी क॑
माल – जाल क॑
बथानी केरऽ नादी मं॑ जोरी देतै
दोले – दोल भरी क॑ राखलऽ छै
जेकरा मं॑ पानी दिनै सं॑ ।


नै त॑ गोड़ी दन्न॑
जे किल्ला गाड़लऽ छै
ओकरा मं॑ जोरी देतै
फेरू भर दिन जे टिकोला चुनन॑ छै
जोगिया बगिच्चा मं॑ अँगना धरी ऐतै
गुड़म्मा आरू चटनी बनै ल॑ ।


धरफरैलऽ दोल उघैन समेटतें
पहुँची जैतै इनारा प॑
नहैतै फेरू दूध दुहतै
छानी क॑ गाय क॑
गरगूँ -गरगूँ करी
कंतरा मं॑ भरी लेतै ।


तब तलक खाना बनी चुकलऽ रहतै
खैतै आरू दलानी प॑ आबी खटिया पर पटाय जैतै
झुप्पै सं॑ ल॑ करी क॑ गहरऽ नीन मंं॑ ठर्रऽ पारै तालुक
ओकरऽ साँसऽ मं॑ गुरमुरियाय क॑
गम – गम गमकतें रहतै
झिंगली केरऽ फूल ।


घुप्प अन्हारऽ मं॑
आशा के जुगनू छेकै
झिंगली केरऽ फूल
रात केरऽ स्वागत लेली
प्रकृति केरऽ पसरलऽ बाँह छेकै
झिंगली केरऽ फूल ।


Angika Poetry : Jhingli Kerow Phool
Poetry from Angika Poetry Book : Dhamas (धमस)
Poet : Kundan Amitabh


Jhingli_Ridge_Gourd_KerowPhool_1

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