Search Angika Kavita Sahitya

Tuesday, August 11, 2015

अंशऽ बरै छै | अंगिका कविता | कुंदन अमिताभ

अंशऽ बरै छै


— कुंदन अमिताभ —


हल्ला – गुल्ला नै करऽ हो अंशऽ बरै छै
भोकार-ढकार नै पारऽ हो अंशऽ बरै छै ।


जमीनऽ पर नै, रह॑ द॑ तनी देर सपना मं॑
भरम मौसतऽ के देखी तोरऽ अंशऽ बरै छै ।


झरखलऽ जाय छै पर बतलाबै छो चरफरऽ
जंगल मं॑ बस्ती के रफ्तार देखी अंशऽ बरै छै ।


हर बाथै मं॑ पड़ोसी क॑ दोष दै केरऽ खिस्सा
हय रकम सहजैलऽ धात देखी अंशऽ बरै छै ।


इनारा सुखलै ! पीयऽ बस बोतल बंद पानी
देखौसी मं॑ घऽर बिकतें देखी अंशऽ बरै छै ।


मानवता केरऽ सबसं॑ बड़ऽ दुश्मन मानव
टेंगारी आपने गोरऽ प॑ देखी अंशऽ बरै छै ।


Angika Poetry : Ansho Barai Chhai
Poetry from Angika Poetry Book : Dhamas (धमस)
Poet : Kundan Amitabh


Ansho_Bariaye_Chhai_Angika_Poem

No comments:

Post a Comment

Search Angika Kavita Sahitya

Carousel Display

अंगिकाकविता

वेब प नवीनतम व प्राचीनतम अंगिका कविता के वृहत संग्रह

A Collection of latest and oldest Angika Language Poetries , Kavita on the web




Search Angika Kavita Sahitya

संपर्क सूत्र

Name

Email *

Message *