Search Angika Kavita Sahitya

Friday, July 24, 2015

विदाई गीत | अंगिका कविता | श्रीभगवान प्रलय

विदाई गीत


— श्रीभगवान प्रलय —


पोखरी किनारी होय क॑ चलिहें रे कहरा
देखी लेबै बाबा के बहियार रे ।
की जानौं कहिया तक लौटबै नैहरबा
कब तक बसबै ससुरार रे ।
कान दोनों पीन्हैं छेलाँ सरसों के बाली
दुभड़ी अंगूठी पोरे – पोर रे ।
डिकरी-डिकरी कानै गैया-बछड़ुआ
देतै कौनें ओकरा आहार रे ।
सुपती खोसलों खेली भनसा ओसरबा
मौनी छूटी गेलै दुआर रे ।
अछरी गिरलौं हम बाबा के ओसरबा
आबी गेलै डोलिया कहार रे ।
ममता के आँखी बहै ढलमल कोशिका
गंगा रंग बहतें होतै लोर रे ।
तुलसी के चौरा पर अंगूरी के छाप देखी
मैया कानै नुकैलै दुआर रे ।
पोखरी किनारी होय क॑ चलिहें रे कहरा
देखी लेबै बाबा के बहियार रे ।


Angika Poetry :Vidai Geet
Poet : ShriBhagawan Pralay


angika.com_banner_1.

No comments:

Post a Comment

Search Angika Kavita Sahitya

Carousel Display

अंगिकाकविता

वेब प नवीनतम व प्राचीनतम अंगिका कविता के वृहत संग्रह

A Collection of latest and oldest Angika Language Poetries , Kavita on the web




Search Angika Kavita Sahitya

संपर्क सूत्र

Name

Email *

Message *