विदाई गीत
— श्रीभगवान प्रलय —
पोखरी किनारी होय क॑ चलिहें रे कहरा
देखी लेबै बाबा के बहियार रे ।
की जानौं कहिया तक लौटबै नैहरबा
कब तक बसबै ससुरार रे ।
कान दोनों पीन्हैं छेलाँ सरसों के बाली
दुभड़ी अंगूठी पोरे – पोर रे ।
डिकरी-डिकरी कानै गैया-बछड़ुआ
देतै कौनें ओकरा आहार रे ।
सुपती खोसलों खेली भनसा ओसरबा
मौनी छूटी गेलै दुआर रे ।
अछरी गिरलौं हम बाबा के ओसरबा
आबी गेलै डोलिया कहार रे ।
ममता के आँखी बहै ढलमल कोशिका
गंगा रंग बहतें होतै लोर रे ।
तुलसी के चौरा पर अंगूरी के छाप देखी
मैया कानै नुकैलै दुआर रे ।
पोखरी किनारी होय क॑ चलिहें रे कहरा
देखी लेबै बाबा के बहियार रे ।
Angika Poetry :Vidai Geet
Poet : ShriBhagawan Pralay

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