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Saturday, June 20, 2015

बादल | अंगिका कविता | डा. अमरेन्द्र

बादल


– डा. अमरेन्द्र –


ताक धिनिक धिन ताक धिनक धिन
मुन्नी ऐलॆ बरसा रॊ दिन


हाथी बनी कॆ बादल आवै
सूँढ़ॊ सॆं सबकॆ नहलावै
उजरॊ – कारॊ ढलमल ढल छै
लगै पहाड़ॊ रं बादल छै
बुली – बुली कॆ सबरॊ ऐंगन
बरसाबै पानी सद्दोखिन
ताक धिनिक धिन ताक धिनक धिन


की समुद्र छै ई बादल मॆं
खेत टटैलॊ डुबलै जल में
खलखल नद्दी की रं उमड़ै
कारॊ मेघ मॆं ठनका लागै
धुँआ बीच मॆं जेना आगिन
ताक धिनिक धिन ताक धिनक धिन


Angika Poetry : बादल
Poetry from Angika Poetry Book : ढोल बजै छै ढम्मक ढम
Poet : Dr. Amrendra

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