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Tuesday, March 19, 2024

कोराना काव्य
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निकलै भी नै लोग, कोराना भारी छै, 
खुल्लम खुल्ला देश, लोग पर गारी छै। 
यहाँ वहाँ सब रोगग्रस्त छै, टीवी बोलै, 
नै जानौं कि अबकी केकरो बारी छै। 
नै छीको, नै खासो, सबसे दूरे बैठो, 
मुँह झांपै ले केन्हो मारामारी छै। 
ढावा, मोल, सड़क, बाजारों बंदी पर, 
अइवो, जयवो कोरानै के जारी छै। 
दिन भर धोवै हाथ, नहैंवो जेकरा मुश्किल, 
चिंतित वहू, जे लगलो होलो किनारी छै। 
मुश्किल मे भगवानो कैरो महिमा अबकी
मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर अजवारी छै। 
सब थरथर छै कोराना से, ओकरा छोडी, 
जें सब्हे कन ले ले होलो उधारी छै। 
________ १९/३/२०
Dr amrendra

Anjani Kumar sharma

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