Angika Kavita | अंगिका कविता
शहीदो के आत्मा | Sahidow Ke Atma
अंजनी कुमार शर्मा| Anjani Kumar Sharma
कश्मीर ते नै मिलतौ,मिलतौ सिर्फ विलाप।।
शहीदो के आत्मा अब,देतौ ही कल्पाय।
तरसभैं पाय-पाय ले,देभैं सब गंवाय।।
छिनी लेले पुलवामा में,निरीह के मुस्कान।
के छै सौसे विश्व में,तोरा रं हैवान।।
अंग के लाल रतन भी,देने छै बलिदान।
दुखो भी नै जतैलको,एक बार इमरान।।
दोनों कान खोली के,घुसाय ले शैतान।
झारी ही देतौ भूत,घुसी-घुसी हनुमान।।
जन्मै छै हमरा यहां,छूच्छे सिर्फ सबूत।
तोरा यहां भरलो छौ,लुच्चा सिनी कपूत।।
आतंकी के विरुद्ध,छै दुनिया एकजूट।
के करे देतौ तोरा,घूसपैठ औ लूट।।
के छोङतौ तोरा जों करतें रहबें जंग।
खुरफाती में अंजनी,मूं होतौ बदरंग।।

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