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Thursday, July 30, 2020

कवित्त | Angika Kavita | Angika Poetry | Anjani Kumar Sharma

Angika Kavita | अंगिका कविता
कवित्त | Kavitta
अंजनी कुमार शर्मा | Anjani Kumar Sharma

 
छै चेहरा भी त कालो आसन बघछाला छै,
लटो में समेलो चंदा करै मुक्ति धार छै।

तोरे कृपा बिना एक्को रहलो नै छै प्राणी,
जहर पचावै वाला केतना उदार छै।

डमरू में रागो भी छै तांडव के तालो भी छै,
चपटी भभूती जिम्मा भरलो भंडार छै।


गल्ला में हारो भी छै सांपो के फुफकारो भी,
ललाटो में छिपलो छै सृष्टि के संहार छै।

शिव जी ओढरदानी नय छै हुनको सानी,
सभ्भे दीन- दुखिया के हरै अंधकार छै।

Angika Kavita | अंगिका कविता
कवित्त | Kavitta
अंजनी कुमार शर्मा | Anjani Kumar Sharma

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