Angika Kavita | अंगिका कविता
कवित्त | Kavitta
अंजनी कुमार शर्मा | Anjani Kumar Sharma
लटो में समेलो चंदा करै मुक्ति धार छै।
तोरे कृपा बिना एक्को रहलो नै छै प्राणी,
जहर पचावै वाला केतना उदार छै।
डमरू में रागो भी छै तांडव के तालो भी छै,
चपटी भभूती जिम्मा भरलो भंडार छै।
गल्ला में हारो भी छै सांपो के फुफकारो भी,
ललाटो में छिपलो छै सृष्टि के संहार छै।
शिव जी ओढरदानी नय छै हुनको सानी,
सभ्भे दीन- दुखिया के हरै अंधकार छै।

No comments:
Post a Comment