डडीर
— कुंदन अमिताभ —
ऐन्जां सं॑ जे लौकै छौं
पातरऽ – पातरऽ
टांगुर – मांगुर डडीर
लगीच गेला पर
बनी जाय छै झरना
जे जीवन क॑ समेटी क॑
चूरू मं॑
उतरी रहलऽ छै
स्वर्ग सं॑ धरती पर
झरी – झरी क॑
जीवन बाँचै ल॑
धरती क॑ ।
डडीर पारलऽ छै
जन्न॑ – तन्न॑ भाग्यऽ के
खाली पहचानै के
जरूरत छै
कोनो न॑ कोनो डडीर
हाथऽ मं॑ पारलऽ डडीरी सं॑
जरूर मेल खैतै
नजर ऐतै डडीर रकम
एकदम सोझऽ रस्ता
मंजिल ताँय पहुँचै केरऽ ।
Angika Poetry : Dadir
Poetry from Angika Poetry Book : Dhamas (धमस)
Poet : Kundan Amitabh

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