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Saturday, August 15, 2015

टंडेल | अंगिका कविता | कुंदन अमिताभ

टंडेल


— कुंदन अमिताभ —


बसबिट्टी केरऽ छाहरी मं॑
नद्दी लगाँ
बंसी ल॑ क॑ बैठलऽ छै
गामऽ के छौरा
बंसी मं॑ छै मजगूत डोरऽ
डोरऽ मं॑ छै चोखऽ खुद्दन
खुद्दन मं॑ छै
माँटी तरऽ सं॑ निकाललऽ
हदियैलऽ जोंकटी
जोंकटी केरऽ गंध
पानी तरऽ मं॑
सगरे पसरी रहलऽ छै
मछरी सूँघी क॑ ऐतै
जोंकटी क॑ हपकन मारतै
खुद्दन मं॑ खुद
बझलऽ चल्लऽ जैतै
डोरऽ सं॑ बँधलऽ टंडेल
उब – डुब कर॑ लागतै
छौराँ बंसी क॑
तड़ाक छीपी लेतै
मछरी निकाली क॑
फेरू सं॑ खुद्दन मं॑
दोसरऽ जोंकटी पिरैलऽ जैतै
फेरू सं॑
टंडेल केरऽ टंडेली सं॑
मछरी फँसाबै मं॑
तल्लीन होय जैतै
गामऽ के छौरा ।


Angika Poetry : Tandel
Poetry from Angika Poetry Book : Dhamas (धमस)
Poet : Kundan Amitabh


tandel_angika_poem

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