Search Angika Kavita Sahitya

Wednesday, July 8, 2015

नूनू बूल॑ पाँव-पाँव | अंगिका कविता | डॉ. नरेश पांडेय चकोर

नूनू बूल॑ पाँव-पाँव


—डा. नरेश पांडेय चकोर —


नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥


बुली-बुली क॑ खाय लाय
आपन्हौं खाय कौआ खिलाय
कौआ बोल॑ काँव-काँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥


बुललऽ-बुललऽ द्वारी जाय
दिय॑ कुतिया क॑ मारी भगाय
कुतिया बोल॑ झाँव-झाँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥


नुनुआ खाय दूध-भात
बिल्ली मौंसी कर॑ झात
बोल मिठ्ठऽ म्याँव-म्याँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥


बुललऽ-बुललऽ बनारस जाय
बनारसऽ सें विद्या रस पाय
सोच॑ घऽर जल्दी जाँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥


आय क॑ माय के मून॑ नैन
पीछू सं॑ बोल॑ मिठ्ठऽ बैन
तब॑ छुअ॑ माय के पाँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥


नूनू पढ़लकऽ वेद पुरान
पढ़ी-लिखी क॑ बनलऽ विद्वान
उन्नत करतऽ देश गैँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥


विद्या के प्रकाश फैलैतऽ
देश विदेश सगरे जैतऽ
सगरे होतै नूनू के गाँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥


Angika Poetry :Noonoo Boolai Pawn Pawn
Poet : Dr. Naresh Pandey ‘Chakore”
Poetry from Angika Poetry Book : Rang Birango Phool



No comments:

Post a Comment

Search Angika Kavita Sahitya

Carousel Display

अंगिकाकविता

वेब प नवीनतम व प्राचीनतम अंगिका कविता के वृहत संग्रह

A Collection of latest and oldest Angika Language Poetries , Kavita on the web




Search Angika Kavita Sahitya

संपर्क सूत्र

Name

Email *

Message *