नूनू बूल॑ पाँव-पाँव
—डा. नरेश पांडेय चकोर —
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥
बुली-बुली क॑ खाय लाय
आपन्हौं खाय कौआ खिलाय
कौआ बोल॑ काँव-काँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥
बुललऽ-बुललऽ द्वारी जाय
दिय॑ कुतिया क॑ मारी भगाय
कुतिया बोल॑ झाँव-झाँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥
नुनुआ खाय दूध-भात
बिल्ली मौंसी कर॑ झात
बोल मिठ्ठऽ म्याँव-म्याँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥
बुललऽ-बुललऽ बनारस जाय
बनारसऽ सें विद्या रस पाय
सोच॑ घऽर जल्दी जाँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥
आय क॑ माय के मून॑ नैन
पीछू सं॑ बोल॑ मिठ्ठऽ बैन
तब॑ छुअ॑ माय के पाँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥
नूनू पढ़लकऽ वेद पुरान
पढ़ी-लिखी क॑ बनलऽ विद्वान
उन्नत करतऽ देश गैँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥
विद्या के प्रकाश फैलैतऽ
देश विदेश सगरे जैतऽ
सगरे होतै नूनू के गाँव ॥
नूनू बूल॑ पाँव-पाँव ॥
Angika Poetry :Noonoo Boolai Pawn Pawn
Poet : Dr. Naresh Pandey ‘Chakore”
Poetry from Angika Poetry Book : Rang Birango Phool

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