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Wednesday, July 1, 2015

बूतरू केरॊ मॊन


 बूतरू केरॊ मॊन  

--- कुंदन अमिताभ ---

बूतरू केरॊ मॊन
सहज होय छै
पानी ऐन्हॊ निच्छल
पानी ऐन्हॊ पारदर्शी

ओकरा जोन ज्ञानॊ 
के रंग सॆं भरलॊ जाय छै
वैन्हॆ रंग प्रतिविम्बित होय छै
ओकरॊ व्यवहार सॆं

ओकरा जोंय भय 
के रंग सॆं भरलॊ जाय छै
भय झलकतै
ओकरॊ व्यवहार सॆं

ओकरा जोंय गलत विचारॊ 
के रंग सॆं भरलॊ जाय छै
गलत विचार झलकतै
ओकरॊ व्यवहार सॆं

ओकरा जोंय अच्छा आदर्शॊ 
के रंग सॆं भरलॊ जाय छै
अच्छा आदर्श झलकतै
ओकरॊ व्यवहार सॆं

ओकरा जोंय महान गुण 
के रंग सॆं भरलॊ जाय छै
महान गुण झलकतै
ओकरॊ व्यवहार सॆं

ओकरा मॆं भरलॊ गेलॊ भल्लॊ रंग 
जीवन केरॊ गरमी पाबी पक्का होय छै
आरू एगॊ बूतरू आदर्श आरू जिम्मेदार 
नागरिक बनै वास्तॆ बड़ॊ होलॊ जाय छै

Angika Poetry : Bootroo Kerow Mon
Poetry from Angika Poetry Book : 
Poet : Kundan Amitabh
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