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Monday, June 1, 2015

कलॆ – कलॆ ऐन्हॊ तॆ

कलॆ – कलॆ ऐन्हॊ तॆ
—– कुंदन अमिताभ —–
कलॆ – कलॆ ऐन्हॊ तॆ करले जाबॆ पारॆ छै.
कलॆ – कलॆ ऐन्हॊ तॆ करले जाबॆ पारॆ छै कि
कोय भी काम करलॊ जाय तॆ एकदम ईमानदारी सॆं
उत्कृष्ट गुणवत्ता सॆं उत्कृष्टता पाबै लॆ
बार-बार अफसोस करी-करी कॆ खराब करलॊ काम कॆ ठीक
करै मॆं उर्जा व्यय करला के बजाय
उत्कृष्ट गुणवत्ता सॆं काम मॆ उत्कृष्टता पाबै लेली
काम करना जादे आसान छै.
कलॆ – कलॆ ऐन्हॊ तॆ करले जाबॆ पारॆ छै कि
जिनगी कॆ धुआँ बनाबै वाला इ सिगरेट, प्रदूषण
कॆ त्यागी कॆ एगॊ आनन्द सॆं भरलॊ जिनगी जीलॊ जाय
सोचॊ सिगरेट तोंय पीबी रहलॊ छौ
कि सिगरेट तोरा पीबी रहलॊ छौं
प्रदूषण सॆं वातावरण कॆ तोंय उड़ाय रहलॊ छौ
कि प्रदूषण तोरा उड़ाबै मॆं लागलॊ छौं
सिगरेटमुक्त, प्रदूषणमुक्त वातावरण के साथ
जिनगी के मौज मनाना जादे आसान छै.
कलॆ – कलॆ ऐन्हॊ तॆ करले जाबॆ पारॆ छै कि
जिनगी जीऎ के कोनॊ उद्देश्य खोजी लेलॊ जाय
जिनगी के सफर लेली कोनॊ दिशा पकड़ी लेलॊ जाय
सावधान होयजा जों कोय तोरा तोरॊ जिनगी कॆ
नियंत्रित करै के प्रयास करी रहलॊ छौं
तोरा तोरहै सॆं अलग करै मॆं भीरी गेलॊ छौं
बोलै छौं हमरा सॆं संबंध राखॊ ऐकरा सॆं नै ओकरा सॆं नै
मॊन के सुनॊ, केकरॊ बहकाबॊ मॆ नै आबॊ
उद्देश्य आरू दिशा के साथ जिनगी जीना जादे आसान छै.
कलॆ – कलॆ ऐन्हॊ तॆ करले जाबॆ पारॆ छै कि
खुद कॆ धोखा मॆं नै राखलॊ जाय
खुद कॆ धोखा मॆं रखला सॆं दोसरॊ धोखा खैतै ऐन्हॊ नै छै
धोखा खैबॊ तोंय जंजाल मॆं फँसभॊ तोंय
जिनगी कॆ नाटक कहलॊ जाबॆ पारॆ
पर नाटक करला सॆं जिनगी के वैतरणी नै पार लागै छै
हर मोड़ पर नाटक आरू हर मोड़ पर बहाना नै
ईमानदार आरू सच्चा होय कॆ
जिनगी कॆ गल्लॊ लगना जादॆ आसान छै.
कलॆ – कलॆ ऐन्हॊ तॆ करले जाबॆ पारॆ छै कि
अज्ञानी रही कॆ ज्ञानी नै बनलॊ जाय
पूछै मॆं लाज लगै छौं तॆ ज्ञानी नै बनॆ पारभॊ
पूछै मॆं लाज लगना अज्ञानता के लक्षण छेकै
पूछॊ कि अज्ञान दूर हुऎ सकॆ
पूछॊ कि ज्ञान मिलॆ सकॆ
अज्ञानता सॆं जी हदियैथौं
पुछला सॆं त्राण मिलथौं
अज्ञानता मॆं रहला सॆं पूछी-पूछी कॆ ज्ञान पाना जादॆ आसान छै.
कलॆ – कलॆ ऐन्हॊ तॆ करले जाबॆ पारॆ छै कि
अन्याय सहै के आदत खतम करलॊ जाय
अन्याय सहना आरू चुप्पी साधी लेना जानवर के आदत छेकै
बोलॊ आवाज उठाबॊ नै तॆ अन्याय बढ़लॆ जैथौं
बोलभॊ तॆ अन्यायी बोलथौं चिकरै छै
चिकरी कॆ मरी जाना ठीक छै मगर चुप्पी साधी कॆ नै
चिकरॊ एतना कि अन्यायी के मानवता जागी जाय
चिकरॊ एतना कि अन्याय थमी जाय
सहै सॆं बोलना चिकरना जादॆ आसान छै.
कलॆ – कलॆ ऐन्हॊ तॆ करले जाबॆ पारॆ छै.

Angika Poetry : Kale Kale Aenhow ta
Poetry from Angika Poetry Book Collection : Sarang
Poet : Kundan Amitabh
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