गरदौआ झरिया पड़ी - पड़ी कॆ
फोका बनी टघरी टघरी कॆ
नद्दी दन्नॆं बढ़ी रहलॊ छै
जौरें आपनॊ बूँदो के साथ
गरदौआ झरिया पड़ी - पड़ी कॆ
घोघी केरॊ संगी बनी कॆ
खोरैय खोरैय टप्पी रहलॊ छै
जौरें आपनॊ बूँदो के साथ
गरदौआ झरिया पड़ी - पड़ी कॆ
सगरे बिथड़लॊ गंदगी कॆ
बहैनै लेनॆ जाय रहलॊ छै
जौरें आपनॊ बूँदो के साथ
गरदौआ झरिया पड़ी - पड़ी कॆ
बयार सथें नरमी घोरी कॆ
घाम ओरैनॆं जाय रहलॊ छै
जौरें आपनॊ बूँदो के साथ
गरदौआ झरिया पड़ी - पड़ी कॆ
जोंकटी सीनी के लानी करी कॆ
ऐंगनां मॆ बिथराय रहलॊ छै
जौरें आपनॊ बूँदो के साथ
गरदौआ झरिया पड़ी - पड़ी कॆ
चटिया सीनी के पीछू पड़ी कॆ
घॊर दन्नॆं बैहाय रहलॊ छै
जौरें आपनॊ बूँदो के साथ
रोपनी सथें राग मिलाय कॆ
रोपनी गीत गाय रहलॊ छै
जौरें आपनॊ बूँदो के साथ
Poetry from Angika Poetry Book : Sarang
Poet : Kundan Amitabh
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