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Friday, June 26, 2015

कैसनॊ ज्ञान


कैसनॊ ज्ञान

--- कुंदन अमिताभ ---

जे ज्ञान तोंय अर्जलॆ छहॊ ओंय
जोंय तोरॊ भोलापन ही खतम करी दहौं
तॆ  इ ज्ञान कोन कामॊ के
इ ज्ञान  तॆ एक बोझ ही भेलै
जिनगी बगदाय देथौं

जे ज्ञान तोंय अर्जलॆ छहॊ ओंय
जोंय तोरा सुपरमैन केरॊ एहसास दिलाभौं
तॆ  इ ज्ञान कोन कामॊ के
इ ज्ञान  तॆ एक बोझ ही भेलै
जिनगी बगदाय देथौं

जे ज्ञान तोंय अर्जलॆ छहॊ ओंय
जोंय तोरा ज्ञानी होय केरॊ एहसास दिलाभौं
तॆ  इ ज्ञान कोन कामॊ के
इ ज्ञान  तॆ एक बोझ ही भेलै
जिनगी बगदाय देथौं

जे ज्ञान तोंय अर्जलॆ छहॊ ओंय
जोंय तोरा  खुशी के एहसास नै दिलाभौं
तॆ  इ ज्ञान कोन कामॊ के
इ ज्ञान  तॆ एक बोझ ही भेलै
जिनगी बगदाय देथौं

जे ज्ञान तोंय अर्जलॆ छहॊ ओंय
जोंय तोरा मुक्त होय के एहसास नै दिलाभौं
तॆ  इ ज्ञान कोन कामॊ के
इ ज्ञान  तॆ एक बोझ ही भेलै
जिनगी बगदाय देथौं

जे ज्ञान तोंय अर्जलॆ छहॊ ओंय
जोंय तोरॊ  मन के अशुद्ध करौं
तॆ  इ ज्ञान कोन कामॊ के
इ ज्ञान  तॆ एक बोझ ही भेलै
जिनगी बगदाय देथौं


Angika Poetry : Kasnow Gyani
Poetry from Angika Poetry Book : Sarang
Poet : Kundan Amitabh
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