Angika Kavita | अंगिका कविता
कश्मीर केरऽ लोर | Kashmir Kerow Lore
by कुंदन अमिताभ | Kundan Amitabh
डार सुखलौ प्यार के पत्ता झरी गेलै
बीयाबानौ मँ बस जालिम हवा बहै छै ।
धूरा-बवंडर मँ लेबझलौ शहरौ के पोर
धोधैलौ रेत सगर बेसुमार बहै छै ।
कन-कन ठार जिगर धुंध व कोहासौ सगर
जिहादी धार मँ स्वर्ग व आजादी बहै छै ।
छिरियलै आतँकी आगिन झरखलै सँसार
लोर कश्मीर के सँघरलै त जग दहै छै ।

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